
प्रदीप कुमार नायक
स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
प्रयागराज के कुंभ में लोग मरे नहीं हैं,बल्कि उन्हें बुलाकर घेरकर बेरहमी से उनका शिकार किया गया हैं l ताकि सत्ता के लोग लाइव प्रसारण के तांडव का भी आनन्द ले सके l अब तो मान लीजिए कि कुंभ के मेले में गेरुआधारी, श्वेतधारी, पीतांबर धारी एक नम्बर के जालसाज हैं,और हम जैसे हिन्दुओं को वह उल्लू और मूर्ख समझते हैं l
हिन्दू धर्म को सबसे ज्यादा खतरा नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ जैसे लोगों से हैं l जिन्होंने धर्म को अपने जूतों का तलवा बना डाला हैं l दस हजार करोड़ों रुपए का मेला सजा दिया सामूहिक मौतों का मजा लेने के लिए l उनकी औकात नहीं थी कुंभ मेला लगाने की,लेकिन माहौल ऐसा बना दिया कि जैसे कुंभ नहीं नहाओगे तो मर जाओगे l मोदी और साह जैसे लोगों को चुनाव प्रचार नहीं रुकना चाहिए l चाहे हजारों लाखों लोग मर जाए l जो मजा वोट मांगने में हैं,वह मजा दर्जनों – सैकड़ों लोगों के मौत में कहां l
मीडिया मोदी और साह का लाइव टेलीकास्ट करने में व्यस्त हैं l किसी मीडिया ने नहीं दिखाया कि पूरा महाकुंभ कुव्यवस्थाओं और अराजकताओं का अखाड़ा बना हुआ हैं l किसी ने नहीं बताया कि योगी सरकार फेल हो गई हैं l कोई पूछने वाला हैं क्या हजारों – करोड़ों रुपए का क्या हुआ ? वो नहीं पूछेंगे l क्योंकि चैनलों के एडिटरों की भी पोल खुल जायेगी l कुंभ में मरने वाले साधारण और गरीब लोग थे न कि बड़े भी आई पी और नेता l जिस देश में इतनी बड़ी घटना के बीच भी आज देश का प्रधानमंत्री चुनावी रैलियां करता हो, उस देश का मीडिया अगर जनता को भेड़ बकरी मान ही रही हैं, तो उसकी गलती क्या हैं ? जागो हिन्दू जागो ?
हमारे यहां यदि कोई व्यक्ति मर जाय तो, शादी हो , भजन कीर्तन हो सबको बन्द कर देते हैं,यह मनुवादी कहते हैं l शोक में कोई शुभ काम नहीं होता हैं,तो कोई बताएगा कि 30-40 लोग कुंभ में मर गए तो कौन सा प्रोग्राम बन्द हुआ l किसने खाना पीना छोड़ा हैं l आखिर क्या हो रहा हैं मेरे देश में l वैसे सरकार द्वारा कुंभ में मरने वालों की संख्या को छुपाने का भी आरोप हैं l
बेगुनाहों की मौत पर तो चुप्पी तोड़ो ? दुखद, जिनके अपने मरे है,उनकी हाय उन समस्त लोगों को खा जायेगी , जो इन लाशों पर रोटी सेक रहे हैं ? लानत हैं ऐसी सरकार ,प्रशासन और अन्य पर ? एक घंटे में 1.5 करोड़ लोगों ने स्नान किया इसकी गिनती तुरंत हो गई l लेकिन 30 से अधिक लोग मर गए यह गिनने में 17 घंटे लग गए l किसी भी धार्मिक स्थल पर भी आई पी की सुविधा को हमेशा के लिए खत्म किया जाय l सभी लोगों को समान दृष्टि से देखा जाए l आम जनता हो चाहे भी आईं पी धार्मिक स्थलों पर सभी को एक बराबर माना जाय l तभी इन सभी घटनाओं पर अंकुश लगेगा l कुंभ मेले की भगदड़ में जो लोग मारे गए वो हिन्दू नहीं थे क्या ? जो घायल हुए वो हिन्दू नहीं थे क्या ? मै उन्हीं की आवाज तो उठा रहा हूं l
कुंभ मेला क्षेत्र में हजारों सी सी टी भी कैमरे लगे हैं l फिर भी भगदड़ के वीडियो क्यों नहीं जारी किए गए ? सरकार आखिर क्या छिपाना चाहती हैं ? भगदड़ मचने की तमाम वजह बताई जा रही हैं l सरकार वीडियो जारी करके अफवाहों पर विराम क्यों नहीं लगा देती ? क्या ये वीडियो भगदड़ में खोए हुए परिजनों को ढूढने में मददगार साबित नहीं हो सकती ? क्या ये वीडियो देखकर लोग आगे के लिए सबक नहीं सीखेंगे l महाकुंभ के भगदड़ में मौत के जिम्मेदार कौन ? जिम्मेदार लोगों को सजा क्यों नहीं ?
आम जनता भगदड़ में मर रहे थे और प्रशासन भाजपा नेताओं को भी आई पी स्नान कराने में व्यस्त थी l भोली भाली जनता को महाकुंभ में बुलाकर मरने के लिए छोड़ देने वाली इनकी सरकार महान हैं,और उनकी बदइंतजामी पर सवाल उठाने वाले लोग सनातन विरोधी और गिद्ध हैं l कुंभ जैसे आस्था के पर्व को राजनीतिक आयोजन बना देने वालों से सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए ? मैं डंके की चोट पर कहूंगा कि सरकार ने इस मेले से सिर्फ पाप कमाया हैं और भगदड़ में मरने वालों का खून इस सरकार के मत्थे मढ़ा जाना चाहिए l
























