
प्रदीप कुमार नायक 17 july
स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
शोखियों में घोला जाय थोड़ी सी शराब , उसमें फिर मिलाई जाय थोड़ा सा शबाब होगा यूं नशा जो तैयार ” …….. कुछ – कुछ इसी फिल्मी गीतों के अंदाज में अगर निजी अस्पताल के साथ साथ स्वास्थ्य विभाग भ्रष्ट हो और फिर उसे राजनीतिक संरक्षण भी मिलता रहे और यदि मरीज के साथ अन्याय,अत्याचार शोषण और जांच में गड़बड़ी हुआ हो और उसके खिलाफ एक व्यक्ति समाज सेवा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने वाले मधुबनी जिला बाबूबरही विधानसभा के पूर्व एम एल सी प्रत्याशी मनोज झा आवाज़ उठाता हो और उस मरीज के परिजन अस्पताल के कर्मचारियों से मैनेज हो जाता हो तो क्या होता होगा ? …….. जरा इसकी कल्पना कीजिए l अगर आप समझदार है तो आप भी बहती गंगा में हाथ धो लीजिए फिर मौज ही मौज हैं l लेकिन अगर भ्रष्ट निजी अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मचाई जा रही लापरवाही और लूट – खसोट के विरुद्ध आवाज़ उठाने की जरा भी जुर्रत की तो समझ लीजिए आपके साथ क्या होने वाला हैं ?
अगर आप इसे प्रत्यक्ष देखना और समझना चाहें तो चलिए एक निजी अस्पताल तथा स्वास्थ्य विभाग की ओर जहां मधुबनी नगर से सटे रांटी रोड स्थित मिथिला नवजीवन अस्पताल में कांको गांव निवासी एक महिला पूनम देवी की रिपोर्ट में 30 जून को हेपेटाइसीस पॉजिटिव बता दिया गया l जबकि 7 जूलाई को उसी महिला ने दूसरे जांच घर में जांच करवाई तो उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई l
मधुबनी के निजी अस्पताल मिथिला नव जीवन में उस महिला का आपरेशन तीन- चार लड़का और एक सफाई कर्मी द्वारा खुली दरवाजे में किया गया l जो एक तरह से अश्लीलता को दर्शाता हैं l जिसपर परिजनों ने इसका पुरजोर विरोध किया था l इसके बाद समाज सेवा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने वाले मनोज झा ने पीड़ित महिला के लिए स्वस्थ्य विभाग से न्याय की मांग एक पत्र देकर कर दी थी l जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच किया गया l इस पर मधुबनी मिथिला नव जीवन अस्पताल के प्रबंधक मनीष रंजन ने कहां कि हमलोगो को पॉजिटिव का रिपोर्ट मिला l इसमें हॉस्पिटल की कोई गलती नही है l यह पैथोलाजी की जिम्मेदारी हैं,उसने रिपोर्ट दिया l उसी के आधार पर यहां के डॉक्टर तथा हमलोगों ने काम किया l
सात दिन के बाद उसने कहीं से जांच करवाया तो उसमें नेगेटिव आया l उन्होंने कहां कि यह तो पैथोलाजी की गड़बड़ी है l यह लैब की गलती है l उन्होंने उसे स्वीकार भी किया है l यह कीट का मामला हैं,तो उसमे ऐसा होता हैं l
इस तरह उस निजी अस्पताल पर कई सवाल खड़े होते हैं? इस अस्पताल में कई गड़बड़ी हुई है l कैसे एक निजी अस्पताल एक महिला का अश्लीलता के साथ खिलवाड़ करता हैं l गलत रिपोर्ट के आधार पर उसे घंटो अश्लील अवस्था में रखता हैं और फिर 74 हजार का बिल बनाता हैं l जब स्वास्थ्य विभाग की टीम आती है,थोड़ी हड़कंप मचती है , असलियत का पता चलता है तो वह 74 हजार का बिल पीड़ित महिला के परिजन को वापस कर दी जाती हैं l
पीड़ित महिला ने अपना दुखड़ा समाज सेवी मनोज झा को सुनाई थी और आशा कार्यकर्ता खुद को बचाते हुए नजर आई l निजी अस्पताल के लूट खसोट के इर्द गिर्द रहने वाले लोग अस्पताल के पक्ष में नजर आए l कुछ साल पहले बेनीपट्टी के अविनाश झा को स्वास्थ्य माफिया ने हत्या करवा दिया था l उक्त निजी अस्पताल के विरुद्ध दर्जनों शिकायते है ,लेकिन कोई देखने तथा सुनने वाला नहीं है l अविनाश झा के हत्या के बाद कोई भी राजनेता या समाजसेवी ने अस्पताल माफिया या स्वास्थ्य माफिया से लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाई l परंतु आज के इस दौर में भी समाज सेवी मनोज झा लगातार इन मुद्दों को उठाते नज़र आ रहे हैं l लगातार स्वास्थ्य माफिया के विरुद्ध बिगुल फूंक रहे हैं और समाज के कोढ़ बन चुके स्वास्थ्य माफिया को जड़ से मिटाने की कोशिश में जुटे हैं l हालांकि उन्होंने बाबूबरही अंचलाधिकारी को उनके विरुद्ध शिकायत किया और उनके विरुद्ध बड़े स्तर से जांच करवाया l
दर असल लोकतंत्र में भ्रष्ट निजी अस्पताल तंत्र के साथ साथ लोकतंत्र के पहरेदार राजनेता ही भ्रष्टाचार के गर्त में डूब गए हो तो फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने वालों की रक्षा कौन करेगा l क्या आप इसे स्वास्थ्य विभाग का दुर्भाग्य नहीं मानेंगे ?

























